रीश्ते कीसी से कुछ ऐसा नीभा लो
की उसके दिल के सारे गम चुरा लो
इतना असर छोड़ दो किसी पर अपना
की हर कोई हमें भी अपना दोस्त बना ले.
Sender-Rachna-
इस दुनिया के बारे में मेरी सोच इस चिट्ठे के ज़रिये मैं आप लोगो से बाटना चाहता हूँ. इसलिए आप एक बार मेरी इन सोच को अपनी निजी या कही भी अपना के देखना. आपको बहुत मज़ा आएगा.
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Posted by मेरी सोच/My Thinking Friday 13 February 2009 at 2:37 AM
रीश्ते कीसी से कुछ ऐसा नीभा लो
की उसके दिल के सारे गम चुरा लो
इतना असर छोड़ दो किसी पर अपना
की हर कोई हमें भी अपना दोस्त बना ले.
Sender-Rachna-
0 comments Labels: अपना पन
Posted by मेरी सोच/My Thinking Saturday 7 February 2009 at 12:26 AM
बोलती है दोस्ती चुप रहता है प्यार
हसती है दोस्ती रुलाता है प्यार ,
मिलाती है दोस्ती जुदा करता है प्यार ,
फिर भी क्यूँ दोस्ती छोड़कर लोग करते है प्यार.. ?
वोह ज़िन्दगी ही क्या जिसमे मोहब्बत नही ,
वोह मोहबत ही क्या जिसमे यादें नही ,
वोह यादें ही क्या जिसमे तुम नही,
और वोह तुम ही क्या जिसके साथ हम नही ….
कितनी मोहबात है उनसे
हमसे बताया न गया
शायद वो समज न सके
या हामी से समजाया न गया
उन्होंने करीब आने की कोशिश न की
और हमसे हाथ बढाया न गया .......
सांसे बनकर साथ निभाएंगे
कोशिस रहेगी की आपको नही सतायेंगे
कभी पसंद न आए साथ अगर तो बता देना
महसूस भी न करापयेंगे इतने दूर चले जायेंगे .......... 
गम मे हँसने वालो को कभी रुलाया नही जाता,
लहरों से पानी को हटाया नही जाता,
होने वाले हो जाते हैं ख़ुद ही दिल से अपने,
किसी को कहकर अपना बनाया नही जाता.
भेजने वाली :रचना जी- 
8 comments Labels: सिर्फ़आपके लिए..........
Posted by मेरी सोच/My Thinking at 12:00 AM
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।
छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।
उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।
वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।
रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।
तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।
हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।
मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।
भेजने वाली :रचना जी
0 comments Labels: दिल की आवाज़
Posted by मेरी सोच/My Thinking Tuesday 16 September 2008 at 1:06 AM






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